Setubandha Scholar Scheme 2026-27: ₹75,000 तक स्कॉलरशिप

भारतीय पारंपरिक ज्ञान, शास्त्र और कलाओं से जुड़े विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का एक अवसर सामने आया है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (Central Sanskrit University) और शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग (Indian Knowledge Systems Division) ने Setubandha Scholar Scheme 2026-27 के लिए प्रवेश संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इस योजना के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems) में Integrated M.Sc.-Ph.D. कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसमें कुल 50 विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रावधान है। चयनित विद्यार्थियों को शुरुआत में M.Sc. की पढ़ाई करनी होगी। इसके बाद निर्धारित शैक्षणिक और विश्वविद्यालय संबंधी शर्तें पूरी करने पर ही Ph.D. में पंजीकरण का अवसर मिलेगा। योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल पारंपरिक शिक्षा से जुड़े ज्ञान और प्रशिक्षण को महत्व दिया गया है। गुरु-शिष्य परंपरा या गुरुकुल में लंबे समय तक अध्ययन करने वाले विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना में अधिकतम ₹75,000 प्रति माह तक स्कॉलरशिप का प्रावधान है। हालांकि, यह राशि Ph.D. के तीसरे वर्ष के लिए निर्धारित है और सभी चरणों में अलग-अलग शर्तें लागू होंगी।

Setubandha Scholar Scheme 2026-27: योजना की मुख्य जानकारी

इस योजना को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग मिलकर संचालित करेंगे। इसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक विश्वविद्यालयी शिक्षा और शोध से जोड़ना है।

योजना से जुड़ी मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

विवरण जानकारी
योजना का नाम Setubandha Scholar Scheme 2026-27
संचालित करने वाले संस्थान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और IKS Division
मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
कार्यक्रम Integrated M.Sc.-Ph.D. in Indian Knowledge Systems
कुल सीटें 50
प्रारंभिक पढ़ाई M.Sc
अधिकतम मासिक स्कॉलरशिप ₹75,000
आयु सीमा अधिकतम 32 वर्ष
चयन प्रक्रिया| लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा
अध्ययन का तरीका पूर्णकालिक (Full-Time)

किसे मिलेगा Setubandha Scholar Scheme में प्रवेश का अवसर?

इस योजना में सामान्य शैक्षणिक डिग्री के बजाय पारंपरिक ज्ञान और गुरु-शिष्य परंपरा में प्राप्त प्रशिक्षण को प्रमुख आधार बनाया गया है। आवेदक का भारतीय विद्या, शास्त्र या कला के किसी क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से अध्ययन करना जरूरी है। दिशानिर्देशों के अनुसार, आवेदन करने वाले विद्यार्थी को किसी पारंपरिक गुरु या गुरुकुल के अंतर्गत कम से कम पांच वर्ष तक अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए।

इसके अलावा, आवेदक से निम्नलिखित योग्यताओं की अपेक्षा की गई है:

  1.  किसी पारंपरिक गुरु या गुरुकुल के साथ कम से कम पांच वर्ष का अध्ययन।
  2. गुरु के मार्गदर्शन में लगातार और व्यवस्थित प्रशिक्षण।
  3. संबंधित विषय के मूल ग्रंथों और उनकी टीकाओं का पारंपरिक पद्धति से अध्ययन।
  4. संबंधित कला या कौशल में व्यावहारिक प्रशिक्षण, जहां इसकी आवश्यकता हो।
  5. पारंपरिक ज्ञान या अभ्यास में अपनी योग्यता और दक्षता प्रदर्शित करना।
  6. आवेदन के समय गुरु या गुरुकुल से निर्धारित प्रारूप में हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र देना।
  7. विश्वविद्यालय आवेदक के प्रशिक्षण की अवधि, निरंतरता और वास्तविक स्वरूप की जांच कर सकता है। केवल किसी संस्थान के नाम में ‘गुरुकुल’ शब्द होने से विद्यार्थी इस योजना के लिए पात्र नहीं हो जाएगा।

Setubandha Scholar Scheme की आयु सीमा

योजना के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की आयु आवेदन की अंतिम तिथि तक 32 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, किसी विशेष स्थिति में छूट तभी मान्य होगी, जब उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति देकर अधिसूचित किया गया हो। इसलिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाली प्रवेश अधिसूचना में आयु संबंधी शर्तें जरूर देखनी चाहिए।

क्या Shastri, Acharya या MA करने वाले विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं?

हां। दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि Shastri, Acharya या किसी अन्य औपचारिक शैक्षणिक कार्यक्रम में पढ़ रहे विद्यार्थी भी आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें योजना में निर्धारित पारंपरिक अध्ययन और प्रशिक्षण की शर्तें पूरी करनी होंगी। इस योजना में Shastri, B.A., B.Sc., Acharya, M.A., M.Sc. या Ph.D. जैसी डिग्री होना अनिवार्य नहीं है। इसी तरह, केवल ऐसी डिग्री होने से चयन में कोई अतिरिक्त वरीयता या अंक भी नहीं मिलेंगे।  चयन का आधार मुख्य रूप से पारंपरिक अध्ययन, गुरु-शिष्य परंपरा में प्राप्त प्रशिक्षण और संबंधित विषय में अभ्यर्थी की दक्षता होगी।

किन विषयों और कलाओं के विद्यार्थी कर सकते हैं आवेदन?

Setubandha Scholar Scheme के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े 18 विद्यास्थानों और 64 कलाओं के क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

विद्यास्थानों के प्रमुख क्षेत्र:

  • वेद, वेदभाष्य और कर्मकांड
  • शिक्षा, व्याकरण और निरुक्त
  • ज्योतिष
  • वेदांत और पूर्व मीमांसा
  • बौद्ध एवं जैन दर्शन
  • न्याय और वैशेषिक
  • सांख्य और योग
  • प्रत्यभिज्ञा एवं पाशुपत दर्शन
  • आगम और तंत्र
  • अलंकारशास्त्र और छंदशास्त्र
  • इतिहास और पुराण
  • आयुर्वेद और सिद्ध
  • राजनीति, नीति और अर्थशास्त्र
  • स्मृति, धर्मशास्त्र और विधिशास्त्र

इसके अलावा 64 कलाओं में संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला, मूर्तिकला, पाककला, आयुर्वेद से जुड़ी पारंपरिक विधियां, धनुर्वेद, वास्तुकला, बुनाई, काष्ठकला और अन्य हस्तकौशल शामिल हैं। यह सूची दिशानिर्देशों में दिए गए प्रमुख क्षेत्रों और उदाहरणों पर आधारित है। किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थी को पारंपरिक प्रशिक्षण से संबंधित पात्रता की शर्तें पूरी करनी होंगी।

चयन कैसे होगा?

लिखित परीक्षा और इंटरव्यू देना होगा योजना में प्रवेश के लिए केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्र या गुरु का प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं होगा। अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा में भी शामिल होना होगा।

चयन प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:

  • अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पोर्टल या वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करना होगा।
  • आवेदन के साथ निर्धारित प्रारूप में गुरु या गुरुकुल का हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र और मांगे गए अन्य दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
  • विश्वविद्यालय प्राप्त आवेदनों की पात्रता जांच करेगा।
  • पात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाएगी।
  • इसके बाद लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा (Viva Voce) के आधार पर चयन किया जाएगा।

लिखित परीक्षा में संबंधित पारंपरिक विषय के ज्ञान और योग्यता के साथ बुनियादी आधुनिक गणित तथा मानसिक क्षमता से जुड़े प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।हालांकि, परीक्षा का विस्तृत पाठ्यक्रम, अंक विभाजन, मॉडल प्रश्नपत्र, परीक्षा केंद्र और परीक्षा की तारीख अलग से जारी की जाएगी। इसलिए अभ्यर्थियों को प्रवेश संबंधी अगली अधिसूचना का इंतजार करना होगा।

कितनी मिलेगी स्कॉलरशिप? यहां देखें पूरी जानकारी

इस योजना में M.Sc. और Ph.D. के अलग-अलग शैक्षणिक वर्षों के लिए मासिक स्कॉलरशिप निर्धारित की गई है। सबसे अधिक ₹75,000 प्रति माह Ph.D. के तीसरे वर्ष में मिलेंगे।

कार्यक्रम का स्तर वर्ष मासिक स्कॉलरशिप
M.Sc 1st year ₹40,000
M.Sc 2nd year ₹47,500
Ph.D 1st year ₹65,000
Ph.D 2nd year ₹70,000
Ph.D 3rd year ₹75,000

इसके अतिरिक्त, स्वीकृत शैक्षणिक और शोध संबंधी खर्चों के लिए वार्षिक आकस्मिक सहायता (Contingency) का भी प्रावधान है।

  •  M.Sc. के दोनों वर्षों में सालाना अधिकतम ₹1,00,000।
  • Ph.D. के तीनों वर्षों में सालाना अधिकतम ₹2,00,000।

NOTE:- चयनित विद्यार्थियों को शुरुआत में M.Sc. में ही प्रवेश मिलेगा। Ph.D. वाली स्कॉलरशिप M.Sc. सफलतापूर्वक पूरा करने और Ph.D. में औपचारिक पंजीकरण होने के बाद ही लागू होगी।

स्कॉलरशिप जारी रहने के लिए नियमित उपस्थिति, अच्छा आचरण और संतोषजनक शैक्षणिक प्रगति जरूरी होगी। इसके अलावा, विद्यार्थी किसी अन्य स्रोत से दूसरी स्कॉलरशिप, फेलोशिप, वेतन या आर्थिक लाभ एक साथ नहीं ले सकेंगे। भोजन या आवास की सुविधा लेने पर संबंधित शुल्क स्कॉलरशिप से काटा जा सकता है।

M.Sc. कार्यक्रम की फीस कितनी होगी?

विश्वविद्यालय के दिशानिर्देशों में M.Sc. स्तर के लिए वार्षिक और सेमेस्टर के आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया है।  वार्षिक शुल्क:

शुल्क का विवरण राशि
Admission Processing Fee ₹200
Admission Fee ₹300
Enrollment Fee ₹300
Library Security Deposit ₹400
Identity Card Fee ₹100
Student Welfare Fee ₹400
Magazine Fee ₹100
कुल वार्षिक शुल्क ₹1,600

सेमेस्टर शुल्क:

श्रेणी प्रति सेमेस्टर शुल्क
UR, OBC-NCL और EWS ₹2,000
SC, ST और CW ₹1,250

NOTE – M.Sc. के पहले और तीसरे सेमेस्टर में वार्षिक शुल्क जोड़कर कुल फीस UR, OBC-NCL और EWS विद्यार्थियों के लिए ₹3,600 तथा SC, ST और CW विद्यार्थियों के लिए ₹2,850 होगी। दूसरे और चौथे सेमेस्टर में फीस क्रमशः ₹2,000 और ₹1,250 निर्धारित है। Ph.D. स्तर की फीस M.Sc. पूरा होने और पात्रता शर्तें पूरी होने के बाद अलग से बताई जाएगी। विश्वविद्यालय सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से शुल्क में बदलाव भी कर सकता है।

क्या इस कोर्स में सीधे Ph.D. में प्रवेश मिलेगा?

नहीं। इस योजना के तहत चयनित सभी विद्यार्थियों को पहले M.Sc. in Indian Knowledge Systems की पढ़ाई करनी होगी। योजना में प्रवेश मिलना सीधे Ph.D. में पंजीकरण माना नहीं जाएगा। M.Sc. पूरा करने के बाद अभ्यर्थी को लागू UGC नियमों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के अध्यादेशों के अनुसार Ph.D. की पात्रता पूरी करनी होगी। इसके बाद ही औपचारिक पंजीकरण संभव होगा। यह पूर्णकालिक कार्यक्रम है। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित अध्ययन केंद्र पर शारीरिक रूप से उपस्थित रहना होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार दूसरे स्थान पर भी जाना पड़ सकता है।  दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि दूसरे वर्ष के अंत में प्रदर्शन संतोषजनक नहीं होने पर विश्वविद्यालय के नियमों के अधीन M.Sc. की डिग्री लेकर बाहर निकलने का विकल्प हो सकता है। हालांकि, डिग्री और निकास से जुड़े अंतिम नियम विश्वविद्यालय के स्वीकृत पाठ्यक्रम और अध्यादेशों के अनुसार लागू होंगे

Setubandha Scholar Scheme 2026-27: महत्वपूर्ण तिथियां

विवरण तारीख
आवेदन शुरू होने की तिथि 30 अक्टूबर 2026
आवेदन की अंतिम तिथि 29 दिसंबर 2026
आवेदन का माध्यम ऑनलाइन
कुल सीटें 50
कार्यक्रम Integrated M.Sc.-Ph.D.
विषय Indian Knowledge Systems (IKS)

Central Sanskrit University

Important Links

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संपर्क विवरण

योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या किसी तरह की शंका के लिए अभ्यर्थी संबंधित संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं।

NOTE :-अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक प्रवेश अधिसूचना, पात्रता शर्तें और परीक्षा संबंधी निर्देश ध्यान से पढ़ लें।

निष्कर्ष: Setubandha Scholar Scheme 2026-27 उन विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है, जिन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा या गुरुकुल में लंबे समय तक पारंपरिक शिक्षा प्राप्त की है। इस योजना में 50 सीटों पर प्रवेश का प्रावधान है और शैक्षणिक चरण के अनुसार ₹40,000 से ₹75,000 तक मासिक स्कॉलरशिप निर्धारित की गई है। हालांकि, आवेदन की तारीख और परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम अभी अलग अधिसूचना के माध्यम से जारी किया जाना है।

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